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Lyrical Embroideries

Are we supposed to unlove people in order to fully love someone else?

बीती रात, तुम फिर मेरे खयालों में आई। आजकल यह मज़ाक-सा लगता है, ख़ुद से ईमानदार होना and I only find myself thinking about you in fleeting moments before I realise that I am no longer compelled by your aftertaste.... Continue Reading →

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Fibreglass buddy

Fibreglass buddy 1am, beyond life and moonlight and sanity when my mattress wears a slumber coloured hole, you rouse me out of sleep and my groggy voice swipes green to say, "Hello." Hello, my fibreglass buddy. 2 am, before life... Continue Reading →

बहुत दिनों से सोच रहा हूँ, मातृभूमि पर गीत लिखूं

बहुत दिनों से सोच रहा हूँ मातृभूमि पर गीत लिखूं अंतरमन के कोरे कागज़ पर इसको प्राणीत करूँ । लिख दूँ धरा सुनहरी क्यों है गगन ये क्यों हर्षाता है जब खुलते हैं केश वृष्टि के प्रेम ये क्यों गहराता... Continue Reading →

बस जीते चलो वो कविता

सफ़र में है दोनों मैं धूप पहन लेता हूँ तुम छाँव ओढ़ लेना जीवन की इससे सुंदर कविता कोई नहीं लिख पायेगा यथार्थ- जो हम जी रहे हैं मत लिखो वो कविता बस जीते चलो वो कविता जो कोई नहीं... Continue Reading →

सुमेधा, इस एकांत की ध्वनि, सुनी है तुमने?

चाहत की पुकार सुनी है तुमने? हाँ वही जो तुम्हारे तेज़ क़दमों में हिलते पायल के घुंघरुओं से ताल के मोती बन बरखा-सी बरस जाती है। तो कभी हवाओं की सरसराहट संग मुझमें बस जाती है। चुनरी की कपकपाहट सुनी... Continue Reading →

घिर-घिर ध्यान तुम्हारा आया

चन्द्र-किरण-लिपा दरवाज़ा अरुणिम पूरी अँगनाई बड़े सवेरे बुलबुल बोली गूंज गयी शहनाई भोर किरण क्या फूटी मेरी निंदिया टूटी मन ऐसा अकुलाया घिर-घिर ध्यान तुम्हारा आया। ठिठक-ठहर रहे पग मन के सब कुछ सूना-सूना कह तो दूँ मैं अपना उर,... Continue Reading →

गिरहैं – II

हर उधड़ता सिर तुम जोड़ती तो गयी पर जब पलटकर देखता हूँ तो हर जोड़ पर गाँठ दिखाई देती है। तुम तो शायरी लिखती थी। कहते हैं शायर दिल तक झाँक सकता है। आंसुओं में बहते जज़्बात झट से पढ़... Continue Reading →

गिरहैं – I

हम दोनों, जो कभी अलग-अलग हर्फ़ थे, इक रोज़ मिलकर एक लफ्ज़ बना था। उस लफ्ज़ ने इक अरसे में मायने पाये थे। फिर जो कुछ गुज़री तो तुम एक हर्फ़ एक खाने में, मैं एक हर्फ़ एक खाने में।... Continue Reading →

What do I want to become

The funny thing is I can't do what I want to today, so that I shall be able to do what I want tomorrow. But what guarantee do I have of tomorrow? It's like one huge staircase, leading up into... Continue Reading →

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